Monogamy rules

शि ल्पा की मम्मी कहती हैं- हर बच्चे को आत्मनिर्भर होना चाहिए। आप सोच रहे होंगे कि बात आर्थिक मुद्दे की है। जी नहीं। बात अपने काम अपने आप करने की है। जब बच्चे छोटे होते हैं, तो केवल अपने छोटे- मोटे काम कर लेते हैं, लेकिन टीनएज तक आते- आते बहुत से काम आप कर सकते हैं और आपको अभी सीख भी लेना चाहिए। कभी दोस्तों के सामने उपमा बनाना पड़ा, तो मम्मी को मोबाइल करके पूछना तो नहीं पड़ेगी इसकी विधि। इसके अलावा भी घर के सारे काम समझने वाले बच्चे का इम्प्रेशन ही अलग होता है।

शिखर का रोज सुबह का काम है, सुबह देर से सोकर उठना और अपना सामान यहां- वहां ढूंढना। उसे कभी किताब नहीं मिलती, कभी अपना बैग। वो कभी समय पर कॉलेज नहीं पहुंचता। उसकी मम्मी बहुत परेशान रहती हैं, जब वो अपना काम ही नहीं करता, तो अपनी मदद की वे क्या उम्मीद रखें। कॉलेज जाने वाले करीब-करीब सभी लडक़े-लड़कियों की यही हालत होती है।

घर की जिम्मेदारी या काम में हाथ बंटाने के बारे में कौन सोचता है। जबकि घर में ऐसे बहुत से छोटे- छोटे काम होते हैं, जो आसानी से किए जा सकते हैं। डॉगी को घुमाना, गार्डन में पानी देना तो बहुत आसान काम हैं। इन कामों के साथ-साथ टॉयलेट की सफाई, घर की डस्टिंग, कपड़े धोना और मम्मी के साथ टेबल लगवाने जैसे काम भी किए जा सकते हैं। यदि घर में काम करते रहेंगे, तो बाहर भी दिक्कत नहीं होगी।

काम निर्धारित करने के बाद उसकी पर्चियां बनाकर दीवार पर लगा लें और अमल शुरू कर देें। जब घर में साफ-सफाई या करीने से रहने की आदत होगी, तो वह बाहरी दुनिया में आपके बर्ताव में भी दिखाई देगी। सामाजिक दायरे में नाम कमाने के लिए यह भी जरूरी है। बाहर कितने भी अच्छे कपड़े पहनकर घूमो यदि घर या कमरा साफ रखने की आदत नहीं होगी, तो बाहर भी आप यही करेंगे। एक नज़र इन पर भी डालिए –

बुनियादी ज़रूरत है
अ पने कमरे को तो यूं भी साफ रखें अन्यथा जो कमरे में आएगा, वो एक मिनट में जान जाएगा कि आपमें तहज़ीब की कमी है। इसलिए अगली बार से गीला तौलिया और गंदे मोज़े बिस्तर पर छोड़ते वक्त सोचना जरूर।

दूसरे का भी है स्थान
ह मेशा दूसरों के कमरे, लॉकर, कम्प्यूटर टेबल आदि का मान रखें। उनसे बिना पूछे इनका इस्तेमाल न करें। न ही इन पर अपना कोई सामान छोड़ें। ये दूसरे की चीज़ों और स्थान का अतिक्रमण है। टॉयलेट इस्तेमाल का भी एक तरीका होता है। घर में हैं, तो फिर भी चल जाता है मगर यदि हॉस्टल में रहें या किसी के घर जाएं, तो ध्यान रखें किसी का साबुन, पेस्ट, तौलिया वगैरह इस्तेमाल न करें। बाथरूम में गीले कपड़े न छोड़ें। बाथरूम या टॉयलेट इस्तेमाल के बाद गंदा न छोड़ें।

जब आएं मेहमान
ज ब घर में मेहमान आ रहे हों, तो उनके ठहरने वाले कमरे को अच्छी तरह साफ करें। अपनेे उपयोग का सामान कहीं और रख लें, ताकि बार-बार उस कमरे में न जाना पड़े। जब किसी और के यहां जाएं, तो अपनी जरूरत की सारी चीजें साथ लेकर जाएं। जरूरत होने पर ही फोन का इस्तेमाल करें और बाहर जाते वक्त ताला न लगाएं।

घर के छोटे-छोटे काम जैसे पूरे घर की हफ्ते में एक बार सफाई, स्टोर रूम के कबाड़े को फेंकना और घर के वाहन धोना। रसोई में, मां का खाना पकाने, प्लेटें धोने और सफाई में हाथ बंटाना।
मेहमान का अलग रूप
कॉ लेज में हो सकता है पढऩे बाहर जाना पड़े, तब पेइंग गेस्ट के रूप में रहने का मौका भी मिल सकता है। कहीं और रहने में और यहां रहने में फर्क इतना है कि यहां आप पैसे देकर घर की तरह रहते हैं। खाने के नखरों को काबू में रखें और नम्र बने रहें।

ये भी है शोर
ज ब आप रहने की जगह बांटते हैं, तो बहुत सी बातें ध्यान रखना होती हैं। उसमें से एक हैं आवाज करने की आदत। तेज कदमों या जूतों की आवाज, बर्तनों की आवाज, जोर से बोलना या हंसना सब गलत आदतें हैं। यदि संगीत सुनने का शौक हो, तो आवाज नियंत्रण में रखें ताकि किसी को परेशानी न हो। यदि शोर करने की आदत होगी तो बाहर भी न धीमी आवाज में बात करेंगे, न धीरे हंसेंगे।

रेस्टोरेंट, पार्क या धार्मिक स्थल पर भी न चिल्लाएं, न जोर से बोलें। आजकल मोबाइल फोन भी हर टीनएजर के पास होते हैं, जो हर जगह सारा वक्त बजते रहते हैं। थिएटर, हॉस्पिटल और क्लास में ये न ‘टुनियाए’ ध्यान रखें।

दोस्तों के साथ
अ क्सर होता है कैंटीन में साथ में बैठे हैं और अचानक उठकर चल देते हैं क्योंकि आप बोर हो रहे थे। पर ये ठीक नहीं है यदि समूह में बैठे हैं, तो बात खत्म होने पर उठें। अधूरी बात से तब भी न उठें जब बीच में कोई ऐसा व्यक्ति आ जाए जो आपको पसंद न हो। यदि कहीं कोई दोस्त अपने परिचितों के साथ बैठा हो तो उनके बीच में न जा बैठें। हो सकता है वे ऐसी बातें कर रहे हों जिसका आपसे कोई वास्ता न हो।

तुमने सुना …?
ए क और बुरी आदत है ये। किसी ने चावल रखे और आपने अपनी ओर से खिचड़ी पका दी। न गॉसिप सुनें, न इन्हें फैलाएं। यह तो दुधारी तलवार पर चलने जैसा है। आदत न छूटी तो खुद भी घायल हो सकते हैं।

चुप भली
ज ब कोई बात करना न चाहे, तब उसकी इस भावना का सम्मान करें। कुछ पल होते हैं, जिन्हें व्यक्ति अपनी तरह से गुजारना चाहता है।

Leave a Comment