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निकटवर्ती गांव धनाना में शीप पाक्स बीमारी से भेड़ों का मरना अब भी जारी है। मरने वाली भेड़ों की संख्या 130 हो गई है। पशु पालन विभाग की ओर से लगाए गए इंजेक्शन बेअसर साबित हुए हैं। भेड़ पालकों ने प्रशासन से मुआवजे की मांग की है।

गत एक माह से भेड़ों में शीप पाक्स बीमारी फैली हुई है, जिससे अब तक गांव में लगभग 130 भेड़ें इसी की चपेट में आकर काल का ग्रास बन चुकी हैं तथा शेष चार सौ भेड़ों की भी इस बीमारी की चपेट में आने की आशंका बनी हुई है।

जानकारी के अनुसार अब तक बिजेंद्र की दस, सूरतसिंह की 21, पुष्पा देवी की 19, छन्नो देवी की 17, परमजीत की 12, रामपाल का 11, बलजीत की 15 भेड़ें काल का ग्रास बन चुकी हैं।

बरसात के तेज मिजाज को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने विशेष मेडिकल टीमों का गठन किया है। तेज और लगातार बरसात होने के कारण बीमारियां फैलने या लोगों को मेडिकल सहायता पहुंचाने के लिए इन टीमों को तैनात किया जाएगा।

सूत्रों के मुताबिक बरसात के कारण कहीं भी बाढ़ जैसे हालात पैदा होने के कारण लोगों के बीमारी की चपेट में आने या किसी तरह की महामारी के फैलाव को रोकने से लिए गठित इन विशेष मेडिकल टीमों को अलर्ट रहने को कह दिया गया है। इन्हें आदेश मिलते ही काम शुरू करना होगा।

इन टीमों में मेडिकल एक्सपर्ट्ïस शामिल हैं जो पानी में फंस जाने वाले लोगों को उपचार और बचावी उपाय देंगे। डॉक्टरों के अलावा पैरा मेडिकल स्टाफ जिसमें नर्स, मल्टीपर्पज हैल्थ वर्कर्स और एएनएम आदि को भी इन टीमों में शामिल किया गया है।

इन टीमों को विशेष दवाएं, जिनमें साधारण बुखार, मलेरिया, डायरिया और ब्लीचिंग पाउडर के अलावा सांप के काटे के इलाज की किट दी गई हैं। विभाग ने दूषित पानी से फैलने वाली बीमारियों से बचाव का एक्शन प्लान भी तैयार कर लिया है।

स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि पिछले दिनों अचानक हुई जोरदार बरसात जैसे हालात फिर से उभरने पर महामारी कानून 1897 को सख्ती से लागू करने के आदेश भी दे दिए गए हैं।

न उम्र की सीमा हो, न प्रेम का हो बंधन, जब प्यार करे कोई तो देखे केवल मन….। जगजीत सिंह की गजल के इस अंतरे को फिर साकार किया है साठ साल के बुजुर्ग जोड़े ने। जिन्होंने 30 साल पुराने प्यार को हमेशा के लिए एक डोर में बांध लिया।

दादरी अदालत में आज इन दोनों ने कई लोगों के बीच कोर्ट मैरेज कर लिया। इस प्रेम कहानी की शुरुआत 30 साल पहले गांव छपार के समीप लोहारु कैनाल से शुरू हुई। यहां गांव मंदौला निवासी सुरताराम सिंचाई विभाग में चौकीदार के तौर पर कार्यरत था।

नहर के समीप फौजी धन्नाराम का खेत भी पड़ता था। जिसकी सेवानिवृत्ति के करीब तीन साल बाद मौत हो गई। धन्नाराम की पत्नी प्रेम देवी खेतों का कार्य करती थी। इसी दौरान सुरताराम के बड़े भाई ने प्रेम की मुलाकात सुरताराम से कराई।

पहली ही मुलाकात में सुरताराम व प्रेम में प्यार हो गया। उस समय प्रेम चार बच्चों का बाप था। अब इन चारों बच्चों की शादी हो चुकी है। इधर उनका प्यार इतना परवान चढ़ा कि प्रेम ने सुरताराम के प्यार में अंधी होकर परिवार व पति की मिल रही पेंशन को छोड़ उसके साथ रहना शुरू कर दिया।

करीब 12 साल साथ रहने के बाद प्रेम के लडक़े उसे सुरताराम से अलग करके अपने साथ ले गए, लेकिन यह जुदाई ज्यादा दिन बर्दाश्त नहीं हो सकी और दोनों फिर मौका पाकर साथ रहने लगे। पिछले साल जब सरकार की ओर सूखे का मुआवजा वितरित किया जा रहा था तो उस समय प्रेम के नाम पर जमीन निकल आई।

उसके पुत्र एक बार फिर से प्रेम को लेकर अपने गांव ले गए। इस दरम्यान सुरता भी सेवानिवृत्त हो गया। प्रेम कुछ दिन तो अपने लडक़ों के पास रही लेकिन मौका लगते ही घर छोडक़र दुबारा सुरता के पास दौड़ आई। पिछले कई दिनों से दोनों दादरी में एक साथ रह रहे थे। बार-बार की इस जुदाई से निजात पाने के लिए दोनों ने आज कोर्ट मैरेज कर लिया।

बुधवार देर रात देर रात घग्घर नदी में पानी का बहाव खतरे के निशान से चार फीट ऊपर पहुंच गया। इससे उपमंडल के लगभग दो दर्जन गांवों में खड़ी धान की 15 हजार एकड़ फसल डूब गई और दस हजार से अधिक लोग पानी में फंस गए।

जिन गांवों का उपमंडल से सडक़ संपर्क टूट हुआ है, उनमें भूसला, मैंगड़ा, मझेड़ी, रत्ताखेड़ा कड़ाम, मोहनपूर, बुडनपूर, सडक़पुर, सिहाली, खंबेड़ा, दाबा, चाबा, लुकमान आदि शामिल हैं। गांव भूसला के अंतर्गत डेरों में रहने वाले पानी में फंसे हैं। इनके घरों में कई-कई फीट पानी जमा हो गया।

प्रशासन ने रात में ही इनके लिए दो मोटरबोट गांव में भेज तो दिए थे, लेकिन वे खराब होने के कारण पीडि़तों तक नहीं पहुंच पाई। मजबूरन ग्रामीणों ने मकानों की छतों पर ही आसरा लिया हुआ है। गांव सरोला में भी यही मंजर है।

उधर पानी का बहाव निरंतर बढ़ता जा रहा है। नदी में वीरवार शाम तक 27 फीट पानी हो गया है। पानी की गति इतनी तेज है कि कई स्थानों पर पटियाला चीका मार्ग टूट गया और वहां दो-दो फीट पानी है। बाढ़ की सूचना पाकर अंबाला मंडल के आयुक्त महा सिंह मलिक, डीसी एचएस मलिक ने घग्घर नदी का दौरा किया और बचाव कार्यों का निरीक्षण किया।

एसडीएम कमलेश कुमार भादू ने बताया कि सभी स्थानों पर स्थिति कंट्रोल में है और बाढ़ बचाव के लिए आठ नाव के अतिरिक्त पांच नाव गांवों में भेजी गई हैं। दो नाव कैथल व दो नाव चंडंीगढ़ से मंगवाई गई हैं।

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