विदेशी मुद्रा प्रबंधन अब चुनौती बना: सुब्बा राव

देश में बढ़ते विदेशी निवेश से सरकार असमंजस की स्थिति में है और अब उसे कुछ सूझ नहीं पा रहा है कि बढ़ते विदेशी मुद्रा प्रवाह का प्रबंधन कैसे किया जाए। वित्त सचिव डी सुब्बा राव के मुताबिक आज सवाल यह नहीं है कि विदेशी मुद्रा कैसे आकर्षित की जाये बल्कि अब बड़ा सवाल यह खड़ा हो गया है कि देश में पहुंच रही विदेशी मुद्रा को उत्पादक कार्यो में कैसे लगाया जाए।

उन्होंने कहा कि इस समय देश में कुल सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का करीब तीन प्रतिशत विदेशी मुद्रा प्रवाह हो रहा है लेकिन इसमें से केवल 1.1 प्रतिशत का ही उत्पादक कार्यो में उपयोग हो पा रहा है बाकी विदेशी मुद्रा रिजर्व बैंक के आरक्षित भंडार में जमा हो रही है। निवेश का उपयुक्त माहौल, उदार नीतियां और सरल प्रक्रियाओं के चलते देश में विदेशी मुद्रा भंडार करीब 250 अरब डालर की रिकार्ड स्तर तक पहुंच चुका है लेकिन अब समस्या इसके प्रबंधन की खड़ी हो गई है।

पिछले सप्ताह शेयर बाजार में विदेशी संस्थागत निवेशकों की ताबड़तोड़ खरीदारी से विदेशी मुद्रा प्रवाह और बढ़ गया और इसका असर यह हो रहा है कि अमरीकी डालर के मुकाबले रुपए में 10 प्रतिशत तक मजबूती आ चुकी है। श्री राव ने रुपए की मजबूत होती स्थिति पर व्यक्त की जा रही ¨चताओं को दरकिनार करते हुए कहा कि भारी विदेशी मुद्रा का आगमन रुपए की कमजोर स्थिति को थामने के लिए सोची समझी रणनीति के तहत नहीं हो रहा है वरन् यह तो अब रिजर्व बैंक के लिए एक नई चुनौती के रुप में खडा होता जा रहा है।

आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन (ओईसीडी) रिपोर्ट को जारी करने के मौके पर यहां आयोजित एक सम्मेलन में संवाददाताओं के साथ बातचीत में श्री राव ने कहा कि वर्ष 2008-09 में वित्तीय घाटे को तीन प्रतिशत पर लाने के तय लक्ष्य को हासिल कर लिया जाएगा। लेकिन उन्होंने ब्याज दरों और महंगाई तथा रुपए की स्थिति में संतुलन बनाए रखने को बड़ी चुनौती बताया।

उन्होंने कहा कि डालर रुपया विनिमय दर प्रतिस्पर्धी स्तर पर होनी चाहिए, ब्याज दर अर्थव्यवस्था के लिहाज से अनुकूल और निम्न स्तरीय मुद्रास्फीति की स्थिति को बनाए रखना बड़ी चुनौती है। वित्तीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन कानेन के तहत सरकार ने चालू वित्त वर्ष में वित्तीय घाटे को 3.5 से घटाकर 3.3 प्रतिशत पर लाने का लक्ष्य रखा है अगले वर्ष इसे और घटाकर 3 प्रतिशत तक नीचे लाया जाना है। वित्त सचिव को उम्मीद है कि इस लक्ष्य को हासिल कर लिया जाएगा।

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