अंतरिक्ष में रोजा रखने की जरूरत नहीं

मलेशिया सरकार ने कहा है कि पहले अंतरिक्ष यात्री को अंतरिक्ष में रोजा रखने की जरूरत नहीं है बावजूद इसके कि वह मुस्लिम भी हो और अंतरिक्ष यात्रा रमजान के महीने में हो।

विज्ञान मंत्री जमालुद्दीन जार्जिस ने कहा कि जब आप यात्रा कर रहे हों तो रोजा रखने की बाध्यता नहीं है। गौरतलब है कि इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन के लिए 10 दिनों की यात्रा पर 10 अक्टूबर को तीन अंतरिक्ष यात्री कूच करेंगे जिनमें से एक मलेशिया के शेख मुस्जफर शुकोर भी शामिल हैं।

शेख पहले ही कह चुके हैं कि एक अच्छे मुस्लिम होने के नाते वे चाहेंगे कि अंतरिक्ष में भी रोजा रखा जाए लेकिन पहली प्राथमिकता वैज्ञानिक प्रयोग करना ही होगी। लेकिन जार्जिस ने आज कहा कि ट्रेनिंग के दौरान शेख रोजा रख रहे हैं साथ ही उनके साथी फैज खलीद भी लेकिन वे अंतरिक्ष यात्रा पर जाते वक्त लौटने तक रोजा टाल सकते हैं।

इस्लाम के मुताबिक रमजान का महीना गत 13 सितंबर से शुरू हो चुका है और इसके 12 अक्टूबर को खत्म होने की उम्मीद है यानी कि अगर बहुत जोर दिया जाता है तो शेख को सिर्फ दो या तीन दिन ही अंतरिक्ष में रोजा रखना होगा। जार्जिस ने यह भी कहा कि शेख को पांच बार नमाज अता करने की भी जरूरत नहीं है वे अंतरिक्ष में केवल तीन बार भी नमाज अता करेंगे तो यह काफी होगा।

गौरतलब है कि कुछ दिनों पहले मलेशिया के संप्रदाय प्रमुखों ने अंतरिक्ष में रोजा, वुजू और इबादत से संबंधित दिशा-निर्देश जारी करते हुए कहा था कि मुस्लिम अंतरिक्ष यात्री को पांच बार नमाज अता करने के साथ ही रोजा रखना चाहिए।

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